पहिली बंदव मै गणपति देवा ला, दूजे माँ सरस्वती ज्ञान के देवइया ला। 2
महिमा तोर अपार हवै गा, चार भुजा धारी।
सबले पहिली तोला सुमरथे दुनिया के नर नारी।।
लडुवन के तोला भोग लगे गा,अउ मुसवा हे सवारी।
सबके आस ला पूरा कर दस, आथे जेन दूआरी।।
हमुमन करत हावन तोरेच सेवा ला।
दुजे माँ सरस्वती ज्ञान के देवइया ला।।1
आये हावन तोर दुवारी, हाथ ला पसार के।
पुजा के दीप जलाये हावन, आरती तोर उतार के।।
सेवा तोर बजावत हावन, हम ला तै हर तार दे।
ग्यान के जोत जला ओ मइया, हमर ओ तै शारदे।।
जीयत भर करत रहिबो, हमन तोर सेवा ला।
दुजे माँ सरस्वती ज्ञान के देवइया ला।।2
रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर ,छत्तीसगढ़
मोबा.- 9977213968,9977313968
Gpsahu2.blogspot.com
दिनांक- 05-04-2012
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