आवत हावय सुरता मोला, हमर गुजरे पुरखा के।
जिन ला हमन देखे नइ हन, ओ गुजरे पुरखा के।।
कहाँ रिहीन अउ कइसे दिखय, एला तो हन नइ जानन।
दाई ददा ले सुने रहेन अउ, जेन ला हम पितर मानन।।
उँखर खादी कपड़ा जइसे, धोती बंगाली कुरता के।
आवत हावय सुरता मोला, हमर गुजरे पुरखा के।।
सुने रहेन के हमर पुरखा, रिहीन हे बड़ स्वाभिमानी।
भगत तिलक राजगुरु अउ, लक्ष्मीबाई जइसन सेनानी।।
देश बर येमन जान लुटादिन, भगाये बर गोरखा के। आवत हावय सुरता मोला, हमर गुजरे पुरखा के।।
ये मन ला संगी हम सबो, चलो अब अपन ईश्वर मानन।
इही मन नवा जिनगी दिये हे, इँखर बलिदान ला पहिचानन।।
हमन सबो जी डण्डा हरन, एके ठन गा चरखा के।
आवत हावय सुरता मोला, हमर गुजरे पुरखा के।।
रचना- गुमान प्रसाद साहू ,समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा.- 9977213968, 9977313968
दिनांक- 25-03-2012
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