Tuesday, July 28, 2026

ये धरती हिन्दुस्तान के

।। ये धरती हिन्दुस्तान के।।

ये धरती हिन्दुस्तान के, ना तोरे हे ना मोरे हे।
ये बेटी हर किसान के, ये धरती हिन्दुस्तान के।।

खेत मा येकर उगे सच्चाई, मया भराये खलिहान मा।
बैरी ले घबरावय नही थोरूक, दीया जलथे तुफान मा।।
एक संग इहाँ कदम मिलथे, हिन्दू अउ मुसलमान के। 
ये धरती हिन्दुस्तान के, ये धरती हिन्दुस्तान के।।

देथे इहाँ आवाज हिमालय, जननी तुहिंला बुलाथे।
बदल गेहे इतिहास समय के, तकदीर बदलत जाथे।।
पूजे करव वतन के माटी, मूरत हे भगवान के।
ये धरती हिन्दुस्तान के, ये धरती हिन्दुस्तान के।।

माटी मा येकर सोना उपजे, सोन चिरैय्या कहाथे।
हरियर-हरियर रूखराई हे, कोयली ददरिया गाथे।।
गला मा हावय तुलसी के माला, बोली हे रसखान के। 
ये धरती हिन्दुस्तान के, ये धरती हिन्दुस्तान के।।

जनम धरिन हे ये भुइयाँ मा, कतको झन बीर बलिदानी। 
बीर भगत, शिवाजी, सुभाष, लक्ष्मीबाई झाँसी की रानी।।
सीमा मा करत रखवाली सेना, येकर मान सम्मान के। 
ये धरती हिन्दुस्तान के, ये धरती हिन्दुस्तान के।।

रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना आरंग, जिला- रायपुर, छत्तीसगढ़ 
मोबा.- 9977213968,9977313968
दिनांक- 07-07-2007
Gpsahu2.blogspot.com 

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