Wednesday, July 29, 2026

सबले बढ़के दुनिया मा गा

।। सबले बढ़के दुनिया मा गा।।

जावव चाहे मथुरा कांशी, अउ तिरथ करलव हजार।
धक्का मिलही, झगड़ा मिलही, अउ मिलही गा फटकार।।
भटकत फिरत तैं झन रह, येला करले गा स्वीकार तैं। 
सबले बढ़के दुनिया मा गा, दाई-ददा के प्यार हे।।

कोख ले अपन जनम दिस हमन ला, लाख-लाख पीड़ा ला सहिके।
रिकिम-रिकिम के खाना खवाइस, अपन मन हर  भूखन रहिके।।
दाई-ददा हा चारो धाम अउ, इही मन जिनगी के आधार हे। 
सबले बढ़के दुनिया मा गा, दाई-ददा के प्यार हे।।

पालन करिन पोषन करिन, बचाके भूख अउ प्यास ले।
जम्मो दुख ले दुरिहा राखिन, करकट घाम चम्मास ले।।
अइसन ईश्वर के जे सेवा नइ करिन, ओकर जीना हर बेकार हे।
सबले बढ़के दुनिया मा गा, दाई-ददा के प्यार हे।।

पढ़ा लिखा के हमन ला येमन, जग मा खड़ा कराये हे।
जाँगर तोड़ महिनत ला करके, काबिल हमन ला बनाये हे।।
दुसरिया अउ येमन नइ मिलय, इँखर चरण मा सब संसार हे।
सबले बढ़के दुनिया मा गा, दाई-ददा के प्यार हे।।

रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर ,छत्तीसगढ़
मोबा.- 9977213968,9977313968
दिनांक-: 10-11-2008
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