Wednesday, July 29, 2026

प्रदूषण नोहय महाकाल ये

।। प्रदूषण नोहय महाकाल ये।।

जल दूषित हवा प्रदूषित, प्रदूषण के ये कमाल हे।
माटी दूषित खेत प्रदूषित, ये प्रदूषण नोहय महाकाल हे।। 

मनखे काटत हे रूखराई ला, अउ दोहन करत हे खनिज के।
जगा- जगा मा कचरा करत हे, नइहे सुरता थोरको तमिज के।।
हवा घलो मा धुआँ घुले हे, बाढ़त कार्बन हा बिकराल हे।
ये प्रदूषण नोहय महाकाल हे, ये प्रदूषण.......

पानी हा पिये के लायक नइहे, ना माटी हा अब साधारण हे।
आनी बानी के होवत हे बीमारी, सबो हा इकरे कारण हे।।
प्रदूषण के कोरा मा समाये, का गंगा अउ का बंगाल हे।
ये प्रदूषण नोहय महाकाल हे, ये प्रदूषण.......

कारखाना हा जहर उगले, झिल्ली प्लास्टिक भरमार।
गुटखा माखुर खाके मनखे, थूकें सड़क दीवार मा खखार।।
नदिया नरवा घुरूवा मा पटाये, कचरा डिस्पोजल के जाल हे।
ये प्रदूषण नोहय महाकाल हे,ये प्रदूषण.......

रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर, छत्तीसगढ़ 
मोबा.- 9977213968, 9977313968
दिनांक- 25-03-2010

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