चिरई चिरगुन खेत खार कहत हे, झिन काटव गा रूखराई ला।
जंगल झाड़ी मेड़ पार कहत हे, झिन काटव गा रूखराई ला।।
ये प्रदूषण कम करथे अउ, देथे सुग्घर प्राण वायु ला।
कार्बन घलो नइ बाढ़न दय अउ, नइ बदलन देवय जलवायु ला।।
इकरे ले तो जिनगानी हावय, झिन घटन दव सुघराई ला।
चिरई चिरगुन खेत खार कहत हे, झिन काटव गा रूखराई ला।।
पेड़ सबो ला छइँहा देथे, अपन लोग लइका के जइसन।
फेर ओला हम काट के संगी, अन्याय करथन गा कइसन।।
पेड़ लगावव बने जतन करके, सुग्घर महकन दव अमराई ला।
चिरई चिरगुन खेत खार कहत हे, झिन काटव गा रूखराई ला।।
ये किसान के हरे सँगवारी, खेती बर पानी गिरइया हे।
घाम प्यास ले दूर रखइया, दुख पीड़ा के हरइया हे।।
इँखर बिना तो काहीं नइहे, बचालव जीवनदायी ला।
चिरई चिरगुन खेत खार कहत हे, झिन काटव गा रूखराई ला।।
रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना - आरंग, जिला- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा.-9977213968,9977313968
दिनांक- 09-10-2008
Gpsahu2.blogspot.com
No comments:
Post a Comment