सुरता लव इँखर मया के छाँव मा, मन मा मूरत ला भरलव गा।
दाई-ददा हे सरग के दुवारी, सेवा ला इँखर सब करलव गा।।
जनम देइन हमन ला अपन, नौ महिना कोख मा राख के।
अंगुरी धरके रेंगना सिखाईन, हमर नखरा सहिन उन लाख हे।।
रोज उठ के बड़े बिहनिया, पइयाँ इँखर सब परलव गा।
दाई-ददा हे सरग के दुवारी, सेवा ला इँखर सब करलव गा।।
खाना खवाइन हमन ला येमन, अपन मन भूखन रहिके।
पढ़ा लिखा के काबिल बनाइन, कतको दुख पीड़ा सहिके।।
हमर ऊपर हे इँखर दूध के करजा, सुरता ओकर करलव गा।
दाई-ददा हे सरग के दुवारी, सेवा ला इँखर सब करलव गा।।
जम्मो दुख ला सहिन हमर, अपन पीड़ा येमन मान के।
घाम प्यास ले बचा के राखिन, अपन करेजा टुकड़ा जान के।।
इँखर सेवा हे सरग निसेनी, सेवा ला करके सब चढ़लव गा।
दाई ददा हे सरग के दुवारी, सेवा ला इँखर सब करलव गा।।
छाती ले लगाके राखिन हमन ला, देइन मया अउ दुलार हे।
बिना इँखर हमर जिनगी के कल्पना, करना घलो बेकार हे।।
दाई ददा के चरण के धुर्रा, माथा मा अपन सब मढ़लव गा।
दाई ददा हे सरग के दुवारी, सेवा ला इँखर सब करलव गा।।
रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा.- 9977213968, 9977313968
दिनांक- 05-10-2015
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