रोज होवत हे चोरी डकैती, रोज होवत लूटमार हे।
माँ बहिनी के इज्जत नइहे, आज बढ़गे अत्याचार हे।।
बईमानी के जग मा बसेरा होगे, ईमानदारी हर आज गँवागे गा।
ये कइसन कलजुग आगे संगी, ये कइसन कलजुग आगे गा।।
आज दुनिया मा आतंक बाढ़गे, अउ बाढ़गे मानुष के दुराचार।
जंगल मन ला काटत हे मनखे, जानवर के करत हे शिकार।।
जंगल घलो मा देखव गा संगी, अब शहरीकरण समागे गा।
ये कइसन कलजुग आगे संगी, ये कइसन कलजुग आगे गा।।
दिनो दिन बाढ़त ईंधन के दाम,अउ बाढ़त हे रोज मँहगाई।
घर घर होवत महाभारत अउ, रोज लड़त हे भाई भाई।।
बड़े परिवार हा सपना होगे, सब अपन अपन छरियागे गा।
ये कइसन कलजुग आगे संगी, ये कइसन कलजुग आगे गा।।
करमा ददरिया ला भुलागे संगी, गावंय सब डिस्को गाना।
रोज मुन्नी बदनाम होवत हे, दुनिया के नइहे गा ठिकाना।।
पश्चिम के चक्कर मा लोगन, रामायण गीता ला भुलागे गा।
ये कइसन कलजुग आगे संगी, ये कइसन कलजुग आगे गा।।
धोती कुरता ला भुलागे, सब पहिनत हे जींस कार्गो। देशी संस्कृति सबो भुलागे, कहत येला टार गो।
टुरी उतारे टुरा के फैशन, हिप्पी कटिंग कटागे गा।
ये कइसन कलजुग आगे संगी, ये कइसन कलजुग आगे गा।।
रचना- गुमान प्रसाद साहू ,समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर ,छत्तीसगढ़
मोबा.-9977213968,9977313968
Gpsahu2.blogspot.com
दिनाँक - 28-03-2012
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