भुइयाँ के लाल किसनहा ला, मोर बारम्बार प्रणाम हे।
कहलाथे गा जेन हर संगी, भुइयाँ के भगवान हे।।
जाँगर तोड़ महिनत ला करके,जेन हर अन्न उपजाथे।
खून पसीना ला एक करके, भुइयाँ के सेवा बजाथे।।
घाम प्यास चम्मास सबो हर, जेकर बर एक समान हे।
भुइयाँ के लाल किसनहा ला, मोर बारम्बार प्रणाम हे।।
भेदभाव काँही नइ जानय, ना ऊँच-नीच के बानी हे।
उँखर बर तो जींयत मरत ले, करना खेती किसानी हे।।
तन ला जलावत करथे महिनत, चाहे भोंमरा या बरसत आसमान हे।
भुइयाँ के लाल किसनहा ला, मोर बारम्बार प्रणाम हे।।
खेती इँखर बर मथुरा काँशी, चारो धाम करना किसानी हे।
धरती दाई के सेवा बजाना, इँखर राम कहानी हे।।
महिनत इँखर रग-रग मा बसे, लहू मा भरे ईमान हे।
भुइयाँ के लाल किसनहा ला, मोर बारम्बार प्रणाम हे।।
रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा.- 9977213968, 9977313968
दिनांक- 27-05-2016
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