भुइयाँ मा चटचट भोंमरा जरथे, हवा मा तन उसनात हे।
घर ले निकलना दूभर होगे, आसो अतेक गरमी जनात हे।।
पारा हर चालीस ले पचास चढ़गे, सुरुज हा आगी उगलत हे।
तन ले पसीना के धार बहाये, लागथे तन हा पिघलत हे।।
हाथ पाँव अंगरा कस जरथे, टोंटा घलो हर सुखात हे।
आसो अतेक गरमी जनात हे............2।।
तरिया अटागे नदिया सुखागे, बोरिंग घलो हा अब तरपत हे।
बुंद भर पानी बर तरसे ला होगे, घाम हा अतेक करकट हे।।
जीव जन्तु सब प्यासा मरत हे, सुरुज देवता अतेक जलात हे।
आसो अतेक गरमी जनात हे........2
गरमी ले जंगल मा आगी लगत हे, खेत दनगार मारत हे।
घर मा रहना मुश्किल होगे, उमस हा तरपा डारत हे।।
पसीना ले तन तरबतर होगे, अइसे लागे तन उफनात हे।
आसो अतेक गरमी जनात हे..........2
रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर, छत्तीसगढ
मोबा.- 9977213968,9977313968
दिनांक- 13-05-2016
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