बगिया तुँहर कइसे महकथे, एक ठन फूल लगा के तो देख।
जिनगी तुँहर कइसे नइ सँवरही, थोरूक तो मुस्का के तो देख।।
आज के ये कलजुग मा संगी, सबो अपने बर जींयत हे।
दूसर ला कोन कहय गा संगी, अपने दाई-ददा ला नइ पुछत हे।।
मया के बरसा कइसे नइ होही, दाई-ददा ला अपना के तो देख।
बगिया तुँहर कइसे नइ महकही, एक ठन फूल लगा के तो देख।।
लोगन पश्चिम के चक्कर मा, अपन संस्कृति ला भुलावत हे।
करमा ददरिया ला भुलाके संगी, डीजे गाना ला गावत हे।।
गोड़ तुँहर कइसे नइ थिरकही, माँदर धुन ला बजा के तो देख।
बगिया तुँहर कइसे नइ महकही, एक ठन फूल लगा के तो देख।।
जंगल ला अब परिया कर डारिन, रूखराई सबो ला काट के।
भुइयाँ घलो ला कंगला कर डारिन, तरिया नरवा ला पाट के।।
खेत खार कइसे नइ लहराही, बरसा के पानी ला तो छेंक।
बगिया तुँहर कइसे नइ महकही, एक ठन फूल लगा के तो देख।।
खेती खार बंजर होवत हे, रासायनिक दवा अउ खाद ले।
पानी घलो हर प्रदूषित होगे हे, इकर मन के अपवाद ले।।
माटी घलो मा सोना उपजही, जैविक कृषि ला अपना के तो देख।
बगिया तुँहर कइसे नइ महकही, एक ठन फूल लगा के तो देख।।
रचना- गुमान प्रसाद साहू ,समोदा (महानदी)
थाना- आरंग, जिला- रायपुर ,छत्तीसगढ़
मोबा.9977213968, 9977313968
दिनांक- 21-09-2013
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