बगावत के खुल्ला मैदान देवत हवँ, देश के नौजवान ला।
उठव उठके मिटा दव, गुलामी के सब निशान ला।।
अबड़ झेलेन गुलामी ला, अउ अब हमन नइ झेलन जी।
अबड़ खेलेन लहू के होली, अउ अब हमन नइ खेलन जी।
अंग्रेज ला कहव वापस कर दय, हमर सब खान सामान ला।
उठव उठके मिटा दव, गुलामी के सब निशान ला।।
फुल के पलंग ला छोड़ के, चले रहिन हे जवाहर लाल।
आँधी मा घलो जलत रिहीस हे, हमर सत्य के मशाल।।
निकाल दे रिहिस हे हमर देश ले, विदेशी हुक्मरान ला।
उठव उठके मिटा दव, गुलामी के सब निशान ला।।
लागत रिहीस हे मुश्किल हावय, अंग्रेज मन ला इहाँ ले भगाना।
फेर लड़े रिहीन हे बड़े जोर ले, शेखर भगत सिंह कस दीवाना।।
पन्द्रह अगस्त सन् सैतालिस मा इहाँ ले, भगाइन हे उन शैतान ला।
उठव उठके मिटा दव, गुलामी के सब निशान ला।।
रचना- गुमान प्रसाद साहू, समोदा (महानदी)
थाना- आरंग , जिला- रायपुर ,छत्तीसगढ़
मोबा.- 9977213968,9977313968
दिनांक- 16-08-2009
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