Thursday, August 31, 2017

"उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया "

"उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया"

उठो रे.... जागो रे...2
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।
सेवा ल बजाबो धरती दाई के,
सबो मिलके लइका सियान ग।

परदेसिया मन सब आके इहाँ,
बने बइठे हे बघुआ रे।
सबो जिनीस ल उही हबकत हे,
जाके हमर ले अघुआ रे।
अब तो जागव बढ़व ग आगू,
देवव येमा धियान ग।
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।

हमरे घर म सब आके इमन,
हमी मन ल ग लुटत हे।
घूना कीड़ा कस ऐमन संगी,
छत्तीसगढ़ ल चुसत हे।
नउकर बनत जात हे सेठ इहाँ के,
अब तो गुनव सब मितान ग।
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।

जाग जहि जेन दिन जनता ह,
परदेसिया मन पछूवाही।
अपन हक ल पाये बर संगी,
छत्तीसगढ़ीया मन अघूवाही।
लहराही फेर धनहा डोली,
जब बोंही ओला किसान ग।
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला- छग रायपुर

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