"आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना"
आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना,
करके मूसवा सवारी।
आस लगाये तोर जोहत हन रसता,
बैठे हन घर के दूआरी।।
एकदंत तँय हर धारी, बल बुद्धि के दाता अस।
सगरो जगत के देवा तँय, अउ भाग बिधाता अस।।
कहिथे सबो जगत मा तोला, देवा मंगलकारी।
आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना, करके मूसवा सवारी ।।1।।
सबो देवता धामी मन मा, बारी तोर सबले पहिली आये।
लगा चक्कर दाई-ददा के,बुद्धिमान तँय सबले कहाये ।।
सबले पहिली तहीं जगत मा, हावस पूजा के अधिकारी।
आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना, करके मूसवा सवारी ।।2।।
रिद्धी सिद्धी ल संग मा लाबे, बप्पा तोरले ये बिनती हे।
कर लेबे तँय अपन भगत मा, नाम के हमरो गिनती हे।।
पा के दरस तोर हम तर जाबो, अउ जाबो ग सब बलिहारी।
आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना, करके मूसवा सवारी।।3।।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
थाना-आरंग ,रायपुर (छग)
मो. :- 9977213968, 9977313968
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