Wednesday, August 30, 2017

"हमन तो छत्तीसगढीया हरन "

"हमन तो छत्तीसगढीया हरन"

हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।
जेन सबो ल मीठ गुरतुर लागे,
अइसन भाखा ल हम कहिथन।

खेती खार हरे हमर दाई ददा,
अउ करम हमर किसानी हे।
मुड़ म पागा कनिहा म धोती,
इही हर ग हमर निसानी हे।
माटी चीर के अन्न उपजाथन,
अउ चटनी संग बासी खइथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

इही माटी म बितीस बचपन,
इहें हमर जिनगानी हे।
इही हमर जियें के आसा,
इही हमर राम कहानी हे।
जांगड़ तोड़ करथन मिहनत,
भूख पियास घलो ल सहिथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

भेद भाव ल हमन जानन नही,
न ऊंच नीच के जुबान हे।
सबो इहाँ रहिथन जुरमिल के,
का हिनदू अउ का मुसलमान हे।
एक दूसर ले सबो हम अपन,
दूख पीड़ा हिरदे के कहिथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

भाखा हमर मीठ छत्तीसगढी,
गाना करमा ददरिया हे।
सेवा ल बजावत धरती दाई के,
माटी के लाल नंगरिहा हे।
भेद नइ जानन कोनो काम म,
सबो काम म जी लहिथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छग
Gpsahu2.blogspot.com

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