"मोर बंदन हे ओ महतारी ल"
जनम देवइया करम लिखइया,
मया के सोनहा थारी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर बंदन हे ओ महतारी ल।
नौ महीना हमला कोख म राखिन,
कतको दूख ल सहि के।
पेट भर हमला खाना खवाइन,
अपन ह भूखन रहि के।
घाम प्यास ले हमला बचइया, ममता के हरियर फूलवारी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर..........
पालन करीन हमर पोषण करीन, रात रात भर जाग के।
जिनगी म दूबारा अउ नइ मिलय, ये वो फूल हरय बाग के।
लाड़ पियार अउ ममता बरसइया, दया के ओ दूलारी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर......
छइयाँ म इकर बितीस बचपन, पले इकर मया दूलार ले।
दुनिया के नजर ले बचा के रखिन, जूड़ सरदी अउ बुखार ले।
जिनगी भर हम भूला नइ पावन, सरग के अइसन दूआरी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर...........
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
आरंग,जिला-रायपुर छग
मो. :- 9977313968
दिनांक- 19-06-2014
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