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" बेटा पीतर ल देवत हे पानी"
पीतर पाँख आगे संगी कउंवा नरियावत छानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।
रंधाये हे बरा सोंहारी,कुटूम ल सबो बुलाये हे।
तरोई साग रंधाके बेटा,पीतर ल हूम लगाये हे।
हूम लगाके बरा-सोंहारी,छींचत छत अउ छानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।
जिंयत म नइ पूछे दाई-ददा ल, लोगन कतका अग्यानी हे।
जग ल छोड़ के चलदीन हे त, मरे म रीतोवत पानी हे।
मरे मनखे का बरा खांही,जिंयत म पूजे ओ सुजानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।
जिंयत म ही सब करलव संगी,
दाई-ददा के सेवा ल।
भाग जगालव ओखर मया पाके,अउ पालव अशिष के मेवा ल।
दाई-ददा के जेन सेवा करथे,ओहर ग बड़ भागमानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977213968
थाना-आरंग,जिला-रायपुर
छत्तीसगढ
Gpsahu2.blogspot.com
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