Thursday, August 31, 2017

" मेटव ग मन के अंधियारी"


शिर्षक-
"मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।"

विधा:- "बिष्णुप्रद छंद"

दीनहीन गरीब के सेवा,
मनखे तैं करले।
सुख दुख म सबके काम आके,
झोली तैं भरले।।
निरमल काया अपन बनाले,
दया मन म भरके।
मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।।
जात पात ल भुलाके सबला,
मित अपन बनाले।
ऊँच नीच के पाट डबरा,
हिरदे म लगाले।।
मन के बैर ल सबो मिटाले,
सुनता दिप धरके।
मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।।
दुसर बर ग झिन खनबे डबरा,
खुद तैं गिर जाबे।
पेंड़ लगाबे तैं आमा के,
तभे फर ल पाबे।।
दया मया ले संगी सबके,
सेवा तैं करके।
मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छग

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