Thursday, August 31, 2017

" नोट के चोट"

विषय - नोट के चोट
विधा- हरिगितीका छंद में प्रयास----------------------------------
पाँच सौ हजार पर रोक जब,
लगाया सरकार है।
नोट के चोट सभी खा रहे,
थम गया बाजार है।।
नोट बदली करने को सभी,
लोग खड़े कतार में।
रोज चक्कर लोग लगा रहे,
बैंकों के द्वार में।। 1।।

सरकार ने नोटबंदी का,
दिया जब फरमान है।
भ्रष्टाचारी जमाखोर का,
लुट गया अरमान है।।
नोट के चोट ने उनपे भी,
किया डर का वार है।
पाँच सौ,हजार पर रोक जब,
लगाया सरकार है।।2।।

भरे बैठे थे जो घरों में,
नोटो के अम्बार है।
कर रहे थे कालेधनों के,
लोग जो व्यापार है।।
आज नोट को वो बहा रहे,
जा नदी के धार है।
पाँच सौ,हजार पर रोक जब,
लगाया सरकार है।।3।।

छूपा बैठे थे कालाधन,
लोग जो इस देश के।
जमा कर रखें थे खातो में,
बैंकों में विदेश के।।
मच रहे अब उनके दिलों में,
आज हाहाकार है।
पाँच सौ ,हजार पर रोक जब,
लगाया सरकार है।।4।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छ.ग.

" नोटबंदी"

विषय - नोटबंदी
विधा - दोहा म परयास
शिर्षक - नोटबंदी ग देस म
-------------------------------
आधा रात करीस जब,
नोट बंद सरकार।
जमा खोर मन मा घलो,
मचगे हाहाकार।।

नोट बंद सरकार के,
बढ़िया हरय उपाय।
पूरा भ्रष्टाचार हा,
तहें खतम हो जाय।।

नोट बंद के होय ले ,
जमा खोर कउवाय।
का करबो अब नोट के,
समझ घलो नइ पाय।।

करिया धन राखे रिहिन,
घर मा लोग लुकाय।
डर मा सब पकराय के,
नोट नदी बोहाय।।

रखे रिहिन घर मा जतन,
नोटों के अम्बार।
काला धन करके जमा,
भरे रिहिन भंडार।।

चलत नोटबंदी हवै,
सरकारी अभियान।
काला धन जेहर रखे,
होगे ग परेशान।।

बदले खातिर नोट ला,
लोगन खड़े कतार।
बैंक मुहाटी हे लगे,
मनखे के भरमार।।

करय नोटबंदी सबो,
बड़े नोट बेकार।
गुल्लक ले निकलत हवै,
चिल्लर के भरमार।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छ.ग.

" तोर कतका करँव बखान ओ"

शिर्षक- मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
करँव तोर बखान ओ।

विधा- हरिगितीका छंद --------------------------

बोहावत हे अरपा पइरी,
महानदी ह साथ हे।
पाँव धोये सोंढूर हसदो ,
लिलाधर सिवनाथ हे।।
दक्षिण कोसल तैं ह कहाये,
माटी हे महान ओ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
करँव तोर बखान ओ।।1।।

हरियर हरियर जंगल झाड़ी,
हरियर खेत खार हे।
बंजर में सोना उपजइया,
मजदुर खेतहार हे।।
सोन चिरईया तैं ह कहाये,
धान के खलिहान ओ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
करँव तोर बखान ओ।।2।।

तोर कोरा म राजिम लोचन,
महामाया दाई हे।
दन्तेसरी,चण्डी,सीतला,
बम्लेसरी माई हे।।
जनम धरिन हे ऋषिमुनि गियानि,
अऊ मजदुर किसान ओ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
करँव तोर बखान ओ ।।3।।

सुत उठके सब बड़े बिहनियाँ,
पग ल परथे तोर ओ।
दुख पीड़ा के हरईया हवस,
सबके दाई मोर ओ।।
बड़ मयारू मया के सबरी,
ममता के खदान ओ।
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
करँव तोर बखान ओ।।4।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छग

" मेटव ग मन के अंधियारी"


शिर्षक-
"मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।"

विधा:- "बिष्णुप्रद छंद"

दीनहीन गरीब के सेवा,
मनखे तैं करले।
सुख दुख म सबके काम आके,
झोली तैं भरले।।
निरमल काया अपन बनाले,
दया मन म भरके।
मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।।
जात पात ल भुलाके सबला,
मित अपन बनाले।
ऊँच नीच के पाट डबरा,
हिरदे म लगाले।।
मन के बैर ल सबो मिटाले,
सुनता दिप धरके।
मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।।
दुसर बर ग झिन खनबे डबरा,
खुद तैं गिर जाबे।
पेंड़ लगाबे तैं आमा के,
तभे फर ल पाबे।।
दया मया ले संगी सबके,
सेवा तैं करके।
मेटव ग मन के अंधियारी,
उज्जर मन करके।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छग

"छोड़बे झिन संगी तै मोर साथ रे"

" छोड़बे झिन संगी तै मोर हाथ रे"

टूरा-
तहूं हवस दीवानी,महूं हवंव दीवाना।
तोर मोर मया ले,चाहे जले जमाना।
जिनगी भर रहिबो दूनो साथ रे।
छोड़बे झिन संगी तै मोर हाथ रे।

टूरी-
महूं हवंव दीवानी,तहूं हवस दीवाना।
तोर मोर मया ले,चाहे जले जमाना।
जिनगी भर रहिबो दूनो साथ रे।
छोड़बे झिन संगी तै मोर हाथ रे।

टूरी -
मोर हिरदे के कुरिया म ग,राखे हंव तुंहिला बसाके।
मन मंदिर के संगी तोला, देवता मै अपन बनाके।
तोरे नाव के टिकुली हे, मोर माथ रे।
छोड़बे झिन संगी तै मोर हाथ रे।

टूरा-
तोरे मया म रे गोरी, होगे हंव मै तो दीवाना।
घर के न सुध हे मोला,न कांही के हवे ठिकाना।
अन्न पानी अब घलो नइ सुहात रे।
छोड़बे झिन संगी तै मोर हाथ रे।

टूरी -
चाहे ग हमर मया बर,बैरी दुनिया हो जावय।
इक दूसर बर मया ह राजा,कमती नइ हो पावय।
मया के तै करबे संगी तै बरसात रे।
छोड़बे झिन संगी तै मोर हाथ रे।

टूरा -
सातों जनम बर ओ रानी,तोला मै अपन बनाहूं।
जिनगी भर सुख अउ दूख में,संगे मै तोर निभाहूं।
लेके मै आहूं, तोर अंगना म बरात रे।
छोड़व नहीं संगी मै तोर हाथ रे।
छोड़बे झिन संगी तै मोर हाथ रे।
छोड़व नहीं संगी मै तोर साथ रे।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977213968
जिला-रायपुर छ.ग

"उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया "

"उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया"

उठो रे.... जागो रे...2
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।
सेवा ल बजाबो धरती दाई के,
सबो मिलके लइका सियान ग।

परदेसिया मन सब आके इहाँ,
बने बइठे हे बघुआ रे।
सबो जिनीस ल उही हबकत हे,
जाके हमर ले अघुआ रे।
अब तो जागव बढ़व ग आगू,
देवव येमा धियान ग।
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।

हमरे घर म सब आके इमन,
हमी मन ल ग लुटत हे।
घूना कीड़ा कस ऐमन संगी,
छत्तीसगढ़ ल चुसत हे।
नउकर बनत जात हे सेठ इहाँ के,
अब तो गुनव सब मितान ग।
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।

जाग जहि जेन दिन जनता ह,
परदेसिया मन पछूवाही।
अपन हक ल पाये बर संगी,
छत्तीसगढ़ीया मन अघूवाही।
लहराही फेर धनहा डोली,
जब बोंही ओला किसान ग।
उठव जागो अब छत्तीसगढ़ीया,
चलो करबो नवा बिहान ग।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला- छग रायपुर

"हे रंग डारत हे श्याम"

हे रंग डारत हे श्याम, राधा ऊपर रंग डारत हे न।
हरियर पिवरा लाल गुलाबी, लाल गुलाबी श्याम लाल गुलाबी ।
हरयर पिवरा लाल गुलाबी, भर भर के पिचका मारत हे श्याम ।
राधा ऊपर रंग डारत हे न।

ब्रज के मोहना किशन कन्हैया।
गोपीयन के संग रास रचइया ।।
गोगोपीयन के संग रास रचइया, सबके मन ल मोही डारत हे श्याम।
राधा ऊपर रंग डारत हे न।
हे रंग डारत हे श्याम, राधा ऊपर रंग डारत हे न।।1।।

रंग गुलाल श्याम संग म लाये।
गोपी गुवाला श्याम सबला रंगाये। गोपी गुवाला श्याम सबला रंगाये, सबो के अंग ल रंग डारत हे श्याम।
राधा ऊपर रंग डारत हे न।
हे रंग डारत हे श्याम, राधा ऊपर रंग डारत हे न।।2।।

वृंदावन म श्याम खेले होरी।
ललिता बिसाखा संग राधिका गोरी।
ललिता बिसाखा संग राधिका गोरी, एक दूसर ल रंग डारत हे श्याम।
राधा ऊपर रंग डारत हे न।
हे रंग डारत हे श्याम, राधा ऊपर रंग डारत हे न।।3।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छ.

" बेटा पीतर ल देवत पानी हे"

umanprasadsahu@gmail.com> wrote:
" बेटा पीतर ल देवत हे पानी"

पीतर पाँख आगे संगी कउंवा नरियावत छानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।

रंधाये हे बरा सोंहारी,कुटूम ल सबो बुलाये हे।
तरोई साग रंधाके बेटा,पीतर ल हूम लगाये हे।
हूम लगाके बरा-सोंहारी,छींचत छत अउ छानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।

जिंयत म नइ पूछे दाई-ददा ल, लोगन कतका अग्यानी हे।
जग ल छोड़ के चलदीन हे त, मरे म रीतोवत पानी हे।
मरे मनखे का बरा खांही,जिंयत म पूजे ओ सुजानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।

जिंयत म ही सब करलव संगी,
दाई-ददा के सेवा ल।
भाग जगालव ओखर मया पाके,अउ पालव अशिष के मेवा ल।
दाई-ददा के जेन सेवा करथे,ओहर ग बड़ भागमानी हे।
उरीद दार,चाऊंर ल चढ़ाके बेटा, पीतर ल देवत पानी हे।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977213968
थाना-आरंग,जिला-रायपुर
छत्तीसगढ

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" बापू तोला परणाम हे "

"बापू तोला प्रणाम हे"

राष्ट्रपिता ओ प्यारे बापू, शत् शत् तोला प्रणाम हे।
जुग जुग ले नइ भूलावन, अमर रहही तोर नाम हे।

जेन हमन नवा जीवन पाये हन, बापू तंही हर देवाये हस।
अहिंसा के नाद छोड़ के, सजग ग सबला बनाये हस।
दुनिया कभू भूला नइ पावय, अइसन ग तोर काम हे।
राष्ट्रपिता ओ प्यारे बापू, शत् शत् तोला परणाम हे।

असहयोग,भारत छोड़ो, अंदोलन ल तै चलाये ग।
अंगरेज मनके शासन ले, देश ल अजाद कराये ग।
अमन शांति ले अजादी चाहेस,
करे कभू न तै संंग्राम हे ।
राष्ट्रपिता ओ प्यारे बापू, शत् शत् तोला प्रणाम हे।

छुआछूत अउ जातपात ल, देश ले तंही मेटाये हस।
अपन काम ल अपन करव, सबला तंही सिखाये हस।
खादी कपड़ा तै हरदम पहिरे, विदेशी रिहिस हराम हे।
राष्ट्रपिता ओ प्यारे बापू, शत् शत् तोला प्रणाम हे।।

खुद तै पीड़ा ल सहि के, देश के दरद ल मेटाये ग।
गोरे शासन म घलो तै हर, देशी क्रान्ति ल लाये ग।
मूँह म तोरे बसे रहिस हे, हरदम राम के नाम हे।
राष्ट्रपिता ओ प्यारे बापू, शत् शत् तोला प्रणाम हे।।

:- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छग

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"भाखा हमर हे छत्तीसगढ़ी "

"भाखा हमर हे छत्तीसगढ़ी"

भाखा हमर हे छत्तीसगढ़ी,
चलो भाषा ऐला बनवाबो ग।
पढ़ई लिखई बोली सबो म,
महतारी भाखा ल अपनाबो ग।

पीड़ा ल हमर समझत नइहे,
छत्तीसगढ़ी महतारी के।
बरसों ले पाये बर तरसत हे,
भाषा म अपन बारी के।
छत्तीसगढ़ी ल चलो हम संगी,
सबो जगा बगराबो ग।
भाखा हमर हे छत्तीसगढ़ी,
चलो भाषा ऐला बनवाबो ग।

सोला बछर होगे राज अलगाये,
तभो ले भाषा नइ कहावत हे।
नेता मन हर भूलागे लगथे ऐला,
तभे छत्तीसगढ़ी म नइ गोठियावत हे।
यहू मन ल घलो ग संगी,
चलो छत्तीसगढ़ी म बोलवाबो ग।
भाखा हमर हे छत्तीसगढ़ी,
चलो भाषा ऐला बनवाबो ग।

अंगरेजी पढ़ पढ़ ईसकूल म लइका,
अंगरेज बनत जावत हे।
दूरिहावत हे अपन संसकिरती ले,
छत्तीसगढ़ी ल भूलावत हे।
ईसकूल कालेज सबो जगा म,
भाखा ल हमर पढ़वाबो ग।
भाखा हमर हे छत्तीसगढ़ी,
चलो भाषा ऐला बनवाबो ग।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
मो. :- 9977313968

"मोर बंदन हे ओ महतारी ल "

"मोर बंदन हे ओ महतारी ल"

जनम देवइया करम लिखइया,
मया के सोनहा थारी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर बंदन हे ओ महतारी ल।

नौ महीना हमला कोख म राखिन,
कतको दूख ल सहि के।
पेट भर हमला खाना खवाइन,
अपन ह भूखन रहि के।
घाम प्यास ले हमला बचइया, ममता के हरियर फूलवारी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर..........

पालन करीन हमर पोषण करीन, रात रात भर जाग के।
जिनगी म दूबारा अउ नइ मिलय, ये वो फूल हरय बाग के।
लाड़ पियार अउ ममता बरसइया, दया के ओ दूलारी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर......

छइयाँ म इकर बितीस बचपन, पले इकर मया दूलार ले।
दुनिया के नजर ले बचा के रखिन, जूड़ सरदी अउ बुखार ले।
जिनगी भर हम भूला नइ पावन, सरग के अइसन दूआरी ल।
मोर बंदन हे ओ महतारी ल, मोर...........

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी)
आरंग,जिला-रायपुर छग
  मो. :- 9977313968

Wednesday, August 30, 2017

"हमन तो छत्तीसगढीया हरन "

"हमन तो छत्तीसगढीया हरन"

हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।
जेन सबो ल मीठ गुरतुर लागे,
अइसन भाखा ल हम कहिथन।

खेती खार हरे हमर दाई ददा,
अउ करम हमर किसानी हे।
मुड़ म पागा कनिहा म धोती,
इही हर ग हमर निसानी हे।
माटी चीर के अन्न उपजाथन,
अउ चटनी संग बासी खइथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

इही माटी म बितीस बचपन,
इहें हमर जिनगानी हे।
इही हमर जियें के आसा,
इही हमर राम कहानी हे।
जांगड़ तोड़ करथन मिहनत,
भूख पियास घलो ल सहिथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

भेद भाव ल हमन जानन नही,
न ऊंच नीच के जुबान हे।
सबो इहाँ रहिथन जुरमिल के,
का हिनदू अउ का मुसलमान हे।
एक दूसर ले सबो हम अपन,
दूख पीड़ा हिरदे के कहिथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

भाखा हमर मीठ छत्तीसगढी,
गाना करमा ददरिया हे।
सेवा ल बजावत धरती दाई के,
माटी के लाल नंगरिहा हे।
भेद नइ जानन कोनो काम म,
सबो काम म जी लहिथन।
हमन तो छत्तीसगढीया हरन,
जइसे पाथन तइसन रहिथन।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर छग
Gpsahu2.blogspot.com

"आबे गणेशा तै हमरो भी अंगना "

"आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना"

आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना,
करके मूसवा सवारी।
आस लगाये तोर जोहत हन रसता,
बैठे हन घर के दूआरी।।

एकदंत तँय हर धारी, बल बुद्धि के दाता अस।
सगरो जगत के देवा तँय, अउ भाग बिधाता अस।।
कहिथे सबो जगत मा तोला, देवा मंगलकारी।
आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना, करके मूसवा सवारी ।।1।।

सबो देवता धामी मन मा, बारी तोर सबले पहिली आये।
लगा चक्कर दाई-ददा के,बुद्धिमान तँय सबले कहाये ।।
सबले पहिली तहीं जगत मा, हावस पूजा के  अधिकारी।
आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना, करके मूसवा सवारी ।।2।।

रिद्धी सिद्धी ल संग मा लाबे, बप्पा तोरले ये बिनती हे।

कर लेबे तँय अपन भगत मा, नाम के हमरो गिनती हे।।

पा के दरस तोर हम तर जाबो, अउ जाबो ग सब बलिहारी।
आबे गणेशा तँय हमरो भी अंगना, करके मूसवा सवारी।।3।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
थाना-आरंग ,रायपुर (छग)
मो. :- 9977213968, 9977313968