Sunday, November 17, 2019

सार छन्द


।।परब आजादी।।

आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।
जय बोलव भारत माता के, राष्ट्र गान ला गावव।
बड़ मुश्किल मा मिले हवै जी, सब ला ये आजादी।
अउ होवन झन देहू संगी, अइसन जी बरबादी।
हरय तिरंगा शान देश के, लहर लहर लहरावव।
आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।।
मनखे मनखे एके हावय, भेद कभू झन जानौ।
जात पात के पाटव डबरा, धरम देश ला मानौ।
भेद मिटालव ऊँच नीच के, सुमता डोर बँधावव।
आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।।

       ।।हवस मयावाली ओ।।
कोनो तोला दुर्गा कहिथे, अउ कोनो काली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, हवस मयावाली ओ।।

बढ़िस हवय भुइयाँ मा दाई, जब जब अतियाचारी।
आये तैंहा रक्षा खातिर, ले के वो अवतारी।।
पापी ला तँय मार गिराये,रुप धर बिकराली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।

कभू धरे तै रूप शीतला, कभू बने बम्लाई।
कभू बने जगदम्बा दाई, कभू बने सम्लाई।।
तीन लोक मा तँही समाये, माँ शेरावाली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।

आये जे हा तोर शरण मा, झोली अपन पसारे।
मन के आशा पूरा करके, जग ले तँही उबारे।।
सबके बिगड़ी तँही बनाये, दर आय सवाली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।

                   ।।मँहगाई।।
दिन-दिन बाढ़त हावय कतका, दुनिया मा मँहगाई।
मनखे मन के हाल बिगड़गे, होवत हे करलाई।।

पेट भरे मजदूर अपन गा, जाँगर टोर कमाथे।
फेर बढ़त मँहगाई सेती, आधा पेट ग खाथे।।

देख हवय बेकारी कतका, ऊपर ले मँहगाई।
भाव जिनिस के आगी लगगे, होवत हे दुखदाई।।

सबो जिनिस हा मँहगा होगे, मँहगा घर के सपना।
मँहगा होगे आज देवता, पूजा करके जपना।।

मँहगा चाँउर दार सबो हा, खीसा होगे ढिल्ला।
मँहगाई मा घर ल चलाना, होगे आटा गिल्ला।।

                 ।।परब हरेली।।
आये हावय परब हरेली, जुरमिल चलव मनाबो।
परब हमर ये पहिली संगी, सुग्घर सब परघाबो।।

सावन मास अमावस्या मा, ये तिहार हा आथे।
गाँव गाँव अउ गली गली मा, हरियाली बगराथे।।

बरदी मा जाके गइया ला, लोंदी सबो खवाबो।
बन कांदा दसमूल गोंदली, के प्रसाद ला खाबो।।

धो धोवाके जिनिस किसानी, सुग्घर सबो सजाथे।।
नरियर चीला फूल चढ़ाके, गुड़ के सँग जेंवाथे।।

नीम डार खोंचे बर राउत, घर घर सबके जाथे।
बइगा घलो अशीस देके, दार चाऊँर पाथे।।

लइका मन हा मचथे गेड़ी, भारी मजा उठाथे।
दीदी बहिनी खो-खो फुगड़ी, खेले भाठा जाथे।।

                 ।।सावन।।
आगे सावन महिना संगी, बरसत हावय पानी।
खेत खार सब भरे लबालब, चूहन लागे छानी।।

करे बियासी चले किसनहा, नाँगर बइला जोड़े।
जोंत खेत ला चपके लेंझा, सँग मा बन ला कोड़े।।

                 ।।छोड़व भेद।।
सुख दुख के जिनगी मा संगी, रहिथे आना जाना।
दुख मा सुख ला जेन खोज ले, मनखे उही सयाना।

मनखे सब झन एके हावय, भेद कभू झन जानव।
जात पात के खन के डबरा, हिरदे ला झन चानव।

ऊँच नीच हा गुण ले होथे, धन ले जी नइ होवय।
मनखे धनवर होवय कतको, पइसा मा नइ सोवय।

Thursday, October 31, 2019

।।कतका करँव बखान। ।

आल्हा छन्द :- गुमान प्रसाद साहू
।। कतका करँव बखान ।।

छत्तिसगढ़ीन दाई तोरे, कतका मै हर करँव बखान। 
गा नइ पावँव महिमा तोरे,  दाई लइका हवँ नादान।।1

बोहावत हे अरपा पैरी, महानदी हर हावै साथ।
पाँव पखारे सोंढुर हसदो, लीलाधर अउ हे शिवनाथ ।।2

हरियर हरियर जंगल झाड़ी, नदियाँ नरवा हवय अपार।
बड़े बड़े पर्वत रुखराई, रतन भरे हावय भरमार ।।3

उठके सब झन बड़े बिहनियाँ, लागै दाई पइयाँ तोर।
पालन हारी हस दुनिया के, बँधे तोर सब अँचरा छोर।।4
 
माटी हावय चंदन तोरे, दया मया के हावस खान।
राखी अस भाई बहिनी के, दाई ममता के पहिचान ।।5

सोन चिरइया कहिथे तोला, धान कटोरा तहीं कहाय।
कोरा हीरा खान भरे हे, महिमा तोरे जग हा गाय।।6

जनम धरिन हे ॠषिमुनि ग्यानी, कोरा तोरे बीर महान।
बंजर मा सोना उपजइया,जन्मे माटी पुत्र किसान।।7।                                   

छन्दकार:- गुमान प्रसाद साहू 
ग्राम:- समोदा (महानदी),
जिला:- रायपुर छत्तीसगढ़

Wednesday, October 2, 2019

जय माता दी बोलते चलो

जय माता दी बोलते चलो,भक्तों मैय्या के द्वारे।
दूर करेगी माँ शेरावाली,सब दु:ख दर्द हमारे।।

उँचे पहाड़ों में है बैठी,मैय्या द्वार सजाये।
भक्त सभी सीढ़िया चढ़कर,दर्शन करने आयें।
बम्लेश्वरी दण्तेश्वरी सब ,इन्हीं के नाम है सारे।
जय माता दी बोलते चलो भक्तों के द्वारे।।1

हम सब सारे लाल उन्हीं के, वो है माता हमारी।
उनके लिए है सब एक बराबर,क्या राजा क्या भिखारी।।
भर देंगी माँ ज्योतावाली,सब खाली झोली हमारे।
जय माता दी बोलते चलो भक्तों मैय्या के द्वारे।।2

भक्त जनों पर पड़ा है,जब जब भी संकट भारी।
दानवों को मार गिराने, तब तब मैय्या ने ली अवतारी।
पहाड़ावाली के लगाते चलो,भक्तों सभी जयकारे।
दूर करेगी माँ शेरावाली, सब दु:ख दर्द हमारे।।3

रचनाकार:- गुमान प्रसाद साहू ,ग्राम -समोदा (महानदी)
जिला रायपुर छत्तीसगढ़
मोबा-9977313968,9977213968
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Thursday, September 26, 2019

" तै हावस मयावाली ओ "

" तै हावस मयावाली ओ "


कउनो तोला दूरगा कहिथे, कहिथे कउनो काली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।

बाढ़िस हावय भूइंयाँ म दाई, जब जब अतियाचारी ओ।
आये तै हर रक्षा करे बर, ले के अवतारी ओ।
पापी ल तै मार गिराये..... मईया तै बिकराली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।।1।।

कभू तै हर शीतला बने, कभू बने महामाई ओ।
कभू तै हर अम्बे ओ दाई, कभू बने तै बमलाई ओ।
तीनों लोक दाई तूही म समाये.... माता शेरावाली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।।2।।

आये जे हर तोर शरण म,
लेवत तोर नाम ओ।
छिन भर म बन जाथे ओ दाई,
ओकर सबे काम ओ।
बिगड़ी ल तै सबके बनाये.... दर पे आये जे सवाली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।।3।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग रायपुर छ.ग

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Tuesday, September 24, 2019

काबर भुलाये रे संगवारी

प्रतियोगिता क्रमांक 32 बर मोर रचना
दिन-बुधवार
दिनांक- 25/09/2019
विषय- काबर भुलाये संगवारी
विधा- मुक्त तुकबंदी(गीत)

काबर भुलाये रे संगवारी,तैं हर मया बढ़ा के।
दिये दगा तै बीच रस्ता मा,मया पीरा ल गढ़ा के।

एक दूसर के खायेंन किरिया, संगें हम जीबो मरबो।
भूलै नही जग सात जनम ले,मया हम अइसन करबो।
जला डरे तै विरह ताप मा, तोर मया बुखार चढ़ा के।
काबर भुलाये रे संगवारी, तैं हर मया बढ़ा के। 

तोर खातिर दाई ददा भुलायेंव,सखी सहेली छूट गे।
छोड़ेव समाज ला तोर मया बर,जम्मो नता हा टूट गे।
छोड़ दिये तै बीच डहरा मा, काबर हाथ बढ़ा के।
काबर भुलाये रे संगवारी, तैं हर मया ल गढ़ा के ।।

देबे दगा तै मोला कहिके, मै नइ जानत रहेंव।
अपन सबो तोला दुख पीरा के, संगी मानत रहेंव।
कहाँ गये तैं अपन मया के ,मोला पाठ पढ़ा के। 
काबर भुलाये रे संगवारी, तैं हर मया बढ़ा के। ।

गुमान प्रसाद साहू, ग्राम:- समोदा (महानदी)
जिला:- रायपुर छ.ग. ,  मो- 9977313968

Wednesday, September 11, 2019

"गौ हत्या" एक कलंक



।।"गौ हत्या" एक कलंक।। :- गुमान प्रसाद साहू

           आज हमर समाज बर एकठिन समस्या दिनोंदिन सुनामी जइसन बाढ़त जात हे,अउ वो समस्या हे "गौ हत्या ",गौ माता ला अपन मतलब बर मारना।जेन गौ माता ला हमन महतारी मानथन,आज मनखे अपन सुवारथ अउ माँस बर ओकर हत्या करत हे।चार पइसा के लोभ मा मनखे गाय गरुवा ला कसाई जगा बेंच देथे।कसाई घलो चार पइसा कमाय बर वोला लेके ,वोकर हत्या करके माँस ला निकाल के बेंच देथे। ता सुनव गौ माता के पीरा ला ओकरे जुबानी मा।

           

          "सुनव गुनव ऐ भारत के मनखे, हमर गौ माता के बानी ला।

           थोरुक पइसा बर काबर बेंच देथव,कसाई तीर हम मुकवा प्राणी ला।।"

कसाई मन हा हम गाय गरूवा ला हिंसा के कसाई खाना मा ले जाथे।जिहाँ चार पाँच दिन ले हमन ला बिना चारा पानी के भूखन लाँघन राखथे,ताकि हमर लहू के हीमोग्लोबिन ह हमर माँस मा चिपक जाये।वोकर बाद हमने ला बेरहमी ले मारत पीटथे अउ हमर चमड़ी ला जिंदा खिंचवा देथे।अउ तो अउ हमर मन के ऊपर  डबकत पानी घलो झलकथे,ताकि हमर माँस नरम हो जाय।फेर मार के हमन ला उल्टा लटका देथे।माँस ला बेरहमी ले काट-काट के बाजार मा बेंचे बर ले जाथे।

                     ये मन अतको घलो पइसा सोंचय  के हमरे दूध ला पी के बड़े होय हे। हमरे दूध गोबर अउ पेशाब ले आनी बानी के दवाई अउ कतको प्रकार के उपयोगी जिनीस ला बनाथे। हमन तो इन ला कोसे घलो नई सकन,काबर के हमन तो महतारी हरन अउ ये सबो हमरे लईका आय।

       " जब तक नइ जागहि लोगन, हमर महतारी संग अइसने होही।

        देख के अपने लइका के करम ला, हर महतारी के हिरदे रोही"।।

       आज ये बहुते चिंता के बात आय के जेन मनखे गौ ला महतारी मानथे, उही मन वोला कसाई मन के हाथ म बेंच देथे। जब तक कसाई खाना ला बंद नइ करवायें जाही तब तक गौ माता ऊपर अइसने अतियाचार होते रही। येकर बर सबो समाज ला जगाये ला परही अउ सरकार ला घलो येकर ऊपर सक्त से सक्त कानून लाये बर परही,तभे ये सब रूक पाही।

       "आवव हम सब ये किरिया खावन,के गौ माता ला बचाबो।

        ओकर ऊपर होवत अतियाचार ला, चलव जड़ ले मिटाबो।।" 

लेखकार:- गुमान प्रसाद साहू

ग्राम:- समोदा(महानदी),आयंगर

जिला :- रायपुर छत्तीसगढ़ 

मोबा:- 9977213968,9977313968

Tuesday, August 6, 2019

(28) तै काबर भूखा मारत हस

।।काबर भूखा मारत हस।।

ढाई महिना ले सुखा पार के, अब तै पानी डारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ल भगवन, तैंहर काबर भूखा मारत हस।।

पानी के अगोरा मा धनहा, गरमी ले खाक होगे।
आस लगाये किसान सपना, जरके राख होगे।
बाजू राज म बाढ़ आये हे, फेर इहाँ सुखा पारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन, तै काबर भूखा मारत हस।।1।।

सोचे रहेन आसो फसल होही ता,सब बिगड़े काम बनाबो।
कोनो बेटी के करबो बिहा, कोनो घर ला अपन बनाबो।
सबो के सपना सपना रहिजाय, अइसन तै कर डारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन,तैं काबर भूखा मारत हस।।2।।

भूखमरी छा जा ही इहाँ, तैंहर पानी अगर नइ बरसाबे।
अब तो हद बाहिर होगे, अउ तैं हर कतका तरपाबे।
जियें के आस टूट जाही सबके, अतका तरसा डारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन, तै काबर भूखा मारत हस।।3।।

खेत मा करवाही लहूटे, तरिया नरवा सुक्खा परगे।
पानी के अगोरा मा भगवान, कतको जीव जन्तु हा मरगे।
सबो जगा तो जम के बरसे,फेर इहें सुखा कार पारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन, तै काबर भूखा मारत हस।।4।।

रचनाकार:- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम:- समोदा (महानदी),आरंग
जिला:- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा:- 9977213968,9977313968
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"(25)ये कइसन बरसात हे"

।ये कइसन बरसात हे।। 

पानी तो गिरत नइहे, भारी गरमी बस जनात हे।
खेत खार हा सुक्खा परगे,ये कइसन बरसात हे। ।

आषाढ़ हर तो सुक्खा बुलकगे, सावन घलो सिरागे।
भादो लगिस ता बादर बैरी हा, नइ जाने कहाँ लुकागे।
छत्तीसगढ़ के किसनहा मन ला, ये कइसन तरपात हे।
ये कइसन बरसात हे संगी, ये कइसन बरसात हे।।1।।

जइसे तइसे ता होइस बोनी, लाख उपाय ला करके।
फेर पानी के नइ बरसे ले, गरमी ले सब मरगे जरके।
खेत खार करवाही लहूटे, अकाल हर अब समात हे।
ये कइसन बरसात हे संगी, ये कइसन बरसात हे।।2।।

कइसे होही हमर गुजारा, खाना कहाँ ले लाबो।
अकाल के मार ले सब्बो, भूखा लाँघन मर जाबो

अइसन अकाल मा अब का होही, तेकर चिंता हा कल्पात हे।
ये कइसन बरसात हे संगी,ये कइसन बरसात हे।।3।।

कतको रोटी बर करही पलायन, कतको हा भूखन मरही।
पानी हर तो गिरत नइहे ता, किसनहा मन काय करही।
सन् 1995 के सुरता हर,रहि रहि फेर याद आत हे।
ये कइसन बरसात हे संगी, ये कइसन बरसात हे।।4।। 

रचना:- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम:- समोदा (महानदी),आरंग
जिला:- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा:- 9977213968,9977313968
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(46)"कब बरसबे तैंहा रे बादर"

।कब बरसबे तैंहा रे बादर।।

कब बरसबे तैंहा रे बादर,हमरो गाँव के धनहा मा।
तोर अगोरा करत बैठे हे, मूड़ धरे किसनहा मन।।

भरे बरसात मा लुकागे हावस, तैंहर कहाँ जाके।
हमर गाँव मा आवत नइ हस, थोरकुन काबर झाँके।।

तोर अगोरा मा सुखावत हावै,जम्मो धनहा डोली।
करत हवस काबर तैंहर, हमर ले आँख मिचौली।।

घुमड़ घुमड़ के आके बादर, जल काबर नइ बरसात हस।
टुहूँ दिखाके किसनहा मन ला, काबर अतका तरसात हस।।

सुरूज उगलत हे आगी जेठ कस,गरमी बाढ़त जात हे।
भरे चम्मास मा भोंमरा जरत हे, ये कइसन बरसात हे।।

रचना:- गुमान प्रसाद साहू,
ग्राम:- समोदा(महानदी),आरंग
जिला:- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा- 9977213968,9977313968
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