Tuesday, August 6, 2019

(46)"कब बरसबे तैंहा रे बादर"

।कब बरसबे तैंहा रे बादर।।

कब बरसबे तैंहा रे बादर,हमरो गाँव के धनहा मा।
तोर अगोरा करत बैठे हे, मूड़ धरे किसनहा मन।।

भरे बरसात मा लुकागे हावस, तैंहर कहाँ जाके।
हमर गाँव मा आवत नइ हस, थोरकुन काबर झाँके।।

तोर अगोरा मा सुखावत हावै,जम्मो धनहा डोली।
करत हवस काबर तैंहर, हमर ले आँख मिचौली।।

घुमड़ घुमड़ के आके बादर, जल काबर नइ बरसात हस।
टुहूँ दिखाके किसनहा मन ला, काबर अतका तरसात हस।।

सुरूज उगलत हे आगी जेठ कस,गरमी बाढ़त जात हे।
भरे चम्मास मा भोंमरा जरत हे, ये कइसन बरसात हे।।

रचना:- गुमान प्रसाद साहू,
ग्राम:- समोदा(महानदी),आरंग
जिला:- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा- 9977213968,9977313968
Gpsahu2.blogspot.com

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