।।काबर भूखा मारत हस।।
ढाई महिना ले सुखा पार के, अब तै पानी डारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ल भगवन, तैंहर काबर भूखा मारत हस।।
पानी के अगोरा मा धनहा, गरमी ले खाक होगे।
आस लगाये किसान सपना, जरके राख होगे।
बाजू राज म बाढ़ आये हे, फेर इहाँ सुखा पारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन, तै काबर भूखा मारत हस।।1।।
सोचे रहेन आसो फसल होही ता,सब बिगड़े काम बनाबो।
कोनो बेटी के करबो बिहा, कोनो घर ला अपन बनाबो।
सबो के सपना सपना रहिजाय, अइसन तै कर डारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन,तैं काबर भूखा मारत हस।।2।।
भूखमरी छा जा ही इहाँ, तैंहर पानी अगर नइ बरसाबे।
अब तो हद बाहिर होगे, अउ तैं हर कतका तरपाबे।
जियें के आस टूट जाही सबके, अतका तरसा डारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन, तै काबर भूखा मारत हस।।3।।
खेत मा करवाही लहूटे, तरिया नरवा सुक्खा परगे।
पानी के अगोरा मा भगवान, कतको जीव जन्तु हा मरगे।
सबो जगा तो जम के बरसे,फेर इहें सुखा कार पारत हस।
छत्तीसगढ़िया किसान ला भगवन, तै काबर भूखा मारत हस।।4।।
रचनाकार:- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम:- समोदा (महानदी),आरंग
जिला:- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा:- 9977213968,9977313968
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