Tuesday, August 6, 2019

"(25)ये कइसन बरसात हे"

।ये कइसन बरसात हे।। 

पानी तो गिरत नइहे, भारी गरमी बस जनात हे।
खेत खार हा सुक्खा परगे,ये कइसन बरसात हे। ।

आषाढ़ हर तो सुक्खा बुलकगे, सावन घलो सिरागे।
भादो लगिस ता बादर बैरी हा, नइ जाने कहाँ लुकागे।
छत्तीसगढ़ के किसनहा मन ला, ये कइसन तरपात हे।
ये कइसन बरसात हे संगी, ये कइसन बरसात हे।।1।।

जइसे तइसे ता होइस बोनी, लाख उपाय ला करके।
फेर पानी के नइ बरसे ले, गरमी ले सब मरगे जरके।
खेत खार करवाही लहूटे, अकाल हर अब समात हे।
ये कइसन बरसात हे संगी, ये कइसन बरसात हे।।2।।

कइसे होही हमर गुजारा, खाना कहाँ ले लाबो।
अकाल के मार ले सब्बो, भूखा लाँघन मर जाबो

अइसन अकाल मा अब का होही, तेकर चिंता हा कल्पात हे।
ये कइसन बरसात हे संगी,ये कइसन बरसात हे।।3।।

कतको रोटी बर करही पलायन, कतको हा भूखन मरही।
पानी हर तो गिरत नइहे ता, किसनहा मन काय करही।
सन् 1995 के सुरता हर,रहि रहि फेर याद आत हे।
ये कइसन बरसात हे संगी, ये कइसन बरसात हे।।4।। 

रचना:- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम:- समोदा (महानदी),आरंग
जिला:- रायपुर, छत्तीसगढ़
मोबा:- 9977213968,9977313968
Gpsahu2.blogspot.com

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