प्रतियोगिता क्रमांक 32 बर मोर रचना
दिन-बुधवार
दिनांक- 25/09/2019
विषय- काबर भुलाये संगवारी
विधा- मुक्त तुकबंदी(गीत)
काबर भुलाये रे संगवारी,तैं हर मया बढ़ा के।
दिये दगा तै बीच रस्ता मा,मया पीरा ल गढ़ा के।
एक दूसर के खायेंन किरिया, संगें हम जीबो मरबो।
भूलै नही जग सात जनम ले,मया हम अइसन करबो।
जला डरे तै विरह ताप मा, तोर मया बुखार चढ़ा के।
काबर भुलाये रे संगवारी, तैं हर मया बढ़ा के।
तोर खातिर दाई ददा भुलायेंव,सखी सहेली छूट गे।
छोड़ेव समाज ला तोर मया बर,जम्मो नता हा टूट गे।
छोड़ दिये तै बीच डहरा मा, काबर हाथ बढ़ा के।
काबर भुलाये रे संगवारी, तैं हर मया ल गढ़ा के ।।
देबे दगा तै मोला कहिके, मै नइ जानत रहेंव।
अपन सबो तोला दुख पीरा के, संगी मानत रहेंव।
कहाँ गये तैं अपन मया के ,मोला पाठ पढ़ा के।
काबर भुलाये रे संगवारी, तैं हर मया बढ़ा के। ।
गुमान प्रसाद साहू, ग्राम:- समोदा (महानदी)
जिला:- रायपुर छ.ग. , मो- 9977313968
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