" तै हावस मयावाली ओ "
कउनो तोला दूरगा कहिथे, कहिथे कउनो काली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।
बाढ़िस हावय भूइंयाँ म दाई, जब जब अतियाचारी ओ।
आये तै हर रक्षा करे बर, ले के अवतारी ओ।
पापी ल तै मार गिराये..... मईया तै बिकराली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।।1।।
कभू तै हर शीतला बने, कभू बने महामाई ओ।
कभू तै हर अम्बे ओ दाई, कभू बने तै बमलाई ओ।
तीनों लोक दाई तूही म समाये.... माता शेरावाली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।।2।।
आये जे हर तोर शरण म,
लेवत तोर नाम ओ।
छिन भर म बन जाथे ओ दाई,
ओकर सबे काम ओ।
बिगड़ी ल तै सबके बनाये.... दर पे आये जे सवाली ओ।
जगत के तै जननी दाई, हावस मयावाली ओ।।3।।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग रायपुर छ.ग
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