" मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी "
मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी..... माटी इहाँ के चंदन हे।
भूइंयाँ म इहाँ भगवान बिराजे..... ये माटी ल मोर बंदन हे।
चारों मुरा छाये हरियाली, जिहाँ बर पीपर के छइयाँ हे।
गुड़ी म बिराजे ठाकुर देंवता, तरिया पार म शीतला मईयाँ हे ।
ये भुइयां म हमन जनम धरे हन, जिनगी हमर धन धन हे।
मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी, माटी इहाँ के चंदन हे।।1।।
करम इहाँ के करना किसानी, खेती खार ह चारों धाम हे।
खून पसीना सब एक हो जाथे, इहाँ करथे अइसन काम हे।
बंजर म इहाँ सोना उपजइया, किसनहा ल मोर बंदन हे।
मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी, माटी इहाँ के चंदन हे।।2।।
दूसर के पीड़ा ल अपन समझथे, इहाँ जूरमिल सबो रहिथे ग।
भेद भाव ला कोनो नइ जाने, सब गुरतुर भाखा म कहिथे ग।
इही हमर हे छइयाँ भूइंयाँ, इही हमर बर लंदन हे।
मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी, माटी इहाँ के चंदन हे।।3।।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग, रायपुर छ.ग.
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