Monday, October 2, 2017

" गांधी बाबा तुंहर देस म "

" गांधी बाबा तुंहर देस "

गांधी बाबा तुहर देस म, देखव का का होवत हे।
फूल के जगा म मनखे, कांटा मनला बोवत हे।।

कुरूक्षेत्र कस लागत हे, आज संसद भवन।
होवत  हावय मरयादा के, जिहाँ चिरहरन।
खलखलावत हे सइतान, मनखे मन सब रोवत हे।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।1।।

लोभ लालच के कण्डिल म, बत्तर कस मनखे झपावत हे।
रईस ह लाठी धरके संगी, कइसे गरीब ल आज कुदावत हे।
अटियावत हे चोरहा लबरा, डाकू ह धन ल जोहत हे।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।2।।

जगा-जगा म बिस्फोट होवत हे, हमर भारत देस म।
अतियाचारी लुकाय बैठे हे, आतंकवादी के भेष म।
नेता मन सबो घर म खूसरे, आराम चैन ले सोवत ह।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।3।।

भाई हर भाई बर बैरी बनगे, बेटा दाई-ददा ल बोझ समझत हे।
संयुक्त परवार म रहना, आज समझथे लोगन कनझट हे ।
राम धंधाय हे जेल म संगी, रावन हर छेल्ला किंदरत हे।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।4।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग, रायपुर छ.ग.

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