"कइसे मनाबो लछमी दाई "
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।
बंजर परे हे धनहा डोली, जिनगी चलत हे उधारी म।
खाये बर घर म दाना नइहे, कलपत हे पापी पेट ह।
इंदर राजा के रिसाये ले, सुक्खा परे सबो खेत ह।
कइसे मै लाहूं दीया चुकी, सजाये तोर पूजा थारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।।1।।
लिपे पोते नइ हन घर अंगना ल, छबाये नइहे दूआरी ओ।
कइसे करबोन हमन दाई, पूजा के तोरे तियारी ओ।
गरीबी के सागर म फंसे हे, डोंगा हमर मझधारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।।2।।
भरे बरसात नइ गिरीस पानी, फसल ह सबो भुँजागे ओ।
किसानी के करजा म दाई, लोगन ह सबो लदागे ओ।
कहाँ ले लाबो भोग तोर दाई, हाल घलो नइहे बारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।।3।।
आस रिहीस हे आसो दाई, तोला बने मनातेन ओ।
चरण तोर पखार ओ दाई, मनके मनौती ल पातेन ओ।
हमर सबो के आस ह दाई, बोहागे अकाल के धारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म ।।4।।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग, रायपुर ,छ.ग.
Gpsahu2.blogspot.com
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