Sunday, April 27, 2025

अपन रंग मा रंगादे

अपन रंग मा रंगादे मोला श्याम रे ......होरी खेलन मै आई।
हरियर ना भावे मोला, पिंयर ना भावे।
पिंयर ना भावे श्याम, पिंयर ना भावे.....2
नीला गुलाबी हा ना आँख भर सकावे।
ना आँख भर सकावे श्याम ना आँख भर सकावे...2
भावे ना लाल रंग श्याम रे....होरी खेलन मै आई 
अपन रंग मा रंगादे मोला श्याम रे .......

ललिता बिसाखा ला तैंहर रंगाये।
तैंहर रंगाये श्याम, तैंहर रंगाये....2
मारे रंग पिचका भर,तन भर रंगाये। 
तन भर रंगाये श्याम तन भर रंगाये ....2
रंगे तै सबो ग्वाल बाल रे....होरी खेलन मै आई 
अपन रंग मा रंगादे मोला श्याम रे .....

गोपी गुवाला संग खेले तै होरी। 
खेले तैं होरी श्याम, खेले तैं होरी....2
संगे खेलत हावय राधिका गोरी।
राधिका गोरी, श्याम राधिका गोरी...2
महूँ ला रंगादे तैंहर श्याम रे ...होरी खेलन मै आई 
अपन रंग मा रंगादेमोला श्याम रे ......

-गुमान प्रसाद साहू ,समोदा (महानदी)
9977213968,9977313968

Friday, March 31, 2023

रोला छन्द

रोला छन्द:- गुमान प्रसाद साहू 

।।गौरी सुत गणराज।।
गौरी सुत गणराज, अपन किरपा बरसा दे,
बना सबो के काज, हमर मन ला हरसा दे।
तोर शरण मा आज, हमन आये हन देवा,
रखबे देवा लाज, करत रहिबो सब सेवा।।1

गजानन्द गणराज, तोर ले हावय विनती,
अपन भगत मा आज, करा ले हमरो गिनती।
रखबे देवा लाज, आय हन हाथ पसारे,
बना सबो के काज, भगत ला लेबे तारे।।2

पहिली बंदन तोर, करय जग के नर-नारी,
पूरा करथस आस, हवस तँय मंगलकारी।
गौरी सुत गणराज, विघन हारी तँय देवा,
सुनले हमर गुहार, करत रहिबो सम सेवा।।3

बढ़गे हावय पाप, आज गा जग मा भारी,
बढ़गे लूट खसोट, बढ़त हे अतियाचारी।
आजा ले अवतार,नाश तैं सबके करदे,

मिटा झूठ अउ पाप,बोझ भुइयाँ के हरदे।।4

रचना- गुमान प्रसाद साहू समोदा (महानदी), जिला-रायपुर छत्तीसगढ़ 

Wednesday, September 9, 2020

"मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई"

"मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई, सबके मन ल भावत हे।"

कोनो कहिथे तोला महिषासुर मर्दनी,
कोनो जगदम्बा पुकारत हे।
पूजा के थारी सजा के भगत मन,
आरती तोर उतारत हे।
कोनो तोला जगजननी कहिके ,
मातारानी ओ बलावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।

कोनो कहिथे तोला दूर्गा भवानी,
कोनो कहिथे तोला महामाई ओ।
कोनो कहिथे तोला काली कंकाली,
कोनो हर शीतला माई ओ।
तोरे दूलरवा भगत ह दाई,
सेवा ल तोरे गावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।

नवे दिन बर आये हस मईय्या,
तै हर हमर दूआरी म।
मया पिरीत बरसावत रहीबे,
मइया हमर फुलवारी म।
शेर के सवारी तोला ओ मईय्या,
बड़ गजब के सुहावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।

नवे दिन के बाद ओ मईय्या,
तै हर चले जाबे ओ।
अपन दूलरवा भगत ल ओ दाई,
तै हर झन भूलाबे ओ।
तोरे बिदाई के नाम ले ओ दाई,
मोर आँखी ले आँसू बोहावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।।

रचना :-
गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
थाना-आरंग रायपुर,छत्तीसगढ़ 
Gpsahu2.blogspot.com 

Saturday, August 22, 2020

गौरी के लाल

मनहरण घनाक्षरी:- गुमान प्रसाद साहू
।।गौरी के लाल।।
आके तोरे द्वार देवा,चरण के करै सेवा,भगत अरज करै,हाथ ला पसार के।
पहिली तोला मनावै,भोग मोदक लगावै,कर दे तै आस पूरा,कहत पुकार के।
बिपत के तै हरैया, तँही मंगल करैया,दुख दर्द दूर करौ,भव ले उबार के।
तँही एकदन्त धारी,मुसवा तोरे सवारी,पार लगा दे नइया,फँसे मँझधार के।।

सुन्दरी सवैया:-।।मंगलकारी गणेश।।
सब ले पहिली सुमरै गणनायक देेव समेत सबो नर नारी।
बिन तोर न काम बने जग के कहिथें तँय हावस मंगलकारी।
बिगड़ी ल बना दुख दूर करे सगरो जग के तँय पालनहारी।
शिवशंकर हावय तोर ददा जग के जननी गिरजा महतारी।।

छन्दकार- गुमान प्रसाद साहू ,ग्राम-समोदा(महानदी)
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ 
छन्द साधक "छन्द के छ" कक्षा-6

Friday, August 14, 2020

देश बर जीबो देश बर मरबो

।।देश बर जीबो देश बर मरबो।।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।
जब तक ले रहि तन मा श्वासा,लाज ला येकर बचाबो ग।।

खून बोहाये हे पुरखा हमर,अंग्रेज ले येला छोड़ाये बर।
हाँसत झुलगे फाँसी मा कतको, आजाद येला कराये बर।।
अइसन बीर सपूत के हमन,करजा ला चुका नइ पाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।1

पाँव पखारय सागर जेकर,खोपा हिमालय कहाथे।
सोन चिरइया हे भुइयाँ मा जेकर,अउ गंगा जमुना बोहाथे।।
जनम धरे हन ये भुइयाँ मा, अउ इही माटी मा मर जाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।2

माटी मा मिला देबो ओला,जे बैरी नजर देश ला लगाही।
कतको करलय प्रयास फेर, येकर धुर्रा घलो ला नइ पाही।।
बनके येकर रखवार हमन सब,सरहद मा येकर डट जाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।3

रचनाकार- गुमान प्रसाद साहू, ग्राम-समोदा(महानदी)
जिला - रायपुर, छत्तीसगढ़ 
Gpsahu2.blogspot.com 

Sunday, July 26, 2020

सरसी छन्द:-चलो मनाबो शिव भोला ला

सरसी छन्द-गुमान प्रसाद साहू

।। चलव मनाबो शिव भोला ला।।

चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।

बेल पान अउ फूल चढ़ाबो, संगे दीया बार।।1

आये हे सावन सम्मारी, रहिबो चलव उपास।
औघड़ दानी हावय बाबा, करही पूरा आस।।2

काँवर मा गंगा जल धरके, जाबो मंदिर द्वार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।3

घेंच साँप के माला पहिरे, कनिहा बघवा छाल।
तन मा चुपरे राख भभूती, रूप दिखै बिकराल।।4

माथ बिराजे चाँद दूज के, जटा म गंगा धार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।5

छन्दकार-गुमान प्रसाद साहू 

ग्राम-समोदा(महानदी),जिला-रायपुर छत्तीसगढ़ 

Sunday, November 17, 2019

सार छन्द


।।परब आजादी।।

आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।
जय बोलव भारत माता के, राष्ट्र गान ला गावव।
बड़ मुश्किल मा मिले हवै जी, सब ला ये आजादी।
अउ होवन झन देहू संगी, अइसन जी बरबादी।
हरय तिरंगा शान देश के, लहर लहर लहरावव।
आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।।
मनखे मनखे एके हावय, भेद कभू झन जानौ।
जात पात के पाटव डबरा, धरम देश ला मानौ।
भेद मिटालव ऊँच नीच के, सुमता डोर बँधावव।
आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।।

       ।।हवस मयावाली ओ।।
कोनो तोला दुर्गा कहिथे, अउ कोनो काली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, हवस मयावाली ओ।।

बढ़िस हवय भुइयाँ मा दाई, जब जब अतियाचारी।
आये तैंहा रक्षा खातिर, ले के वो अवतारी।।
पापी ला तँय मार गिराये,रुप धर बिकराली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।

कभू धरे तै रूप शीतला, कभू बने बम्लाई।
कभू बने जगदम्बा दाई, कभू बने सम्लाई।।
तीन लोक मा तँही समाये, माँ शेरावाली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।

आये जे हा तोर शरण मा, झोली अपन पसारे।
मन के आशा पूरा करके, जग ले तँही उबारे।।
सबके बिगड़ी तँही बनाये, दर आय सवाली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।

                   ।।मँहगाई।।
दिन-दिन बाढ़त हावय कतका, दुनिया मा मँहगाई।
मनखे मन के हाल बिगड़गे, होवत हे करलाई।।

पेट भरे मजदूर अपन गा, जाँगर टोर कमाथे।
फेर बढ़त मँहगाई सेती, आधा पेट ग खाथे।।

देख हवय बेकारी कतका, ऊपर ले मँहगाई।
भाव जिनिस के आगी लगगे, होवत हे दुखदाई।।

सबो जिनिस हा मँहगा होगे, मँहगा घर के सपना।
मँहगा होगे आज देवता, पूजा करके जपना।।

मँहगा चाँउर दार सबो हा, खीसा होगे ढिल्ला।
मँहगाई मा घर ल चलाना, होगे आटा गिल्ला।।

                 ।।परब हरेली।।
आये हावय परब हरेली, जुरमिल चलव मनाबो।
परब हमर ये पहिली संगी, सुग्घर सब परघाबो।।

सावन मास अमावस्या मा, ये तिहार हा आथे।
गाँव गाँव अउ गली गली मा, हरियाली बगराथे।।

बरदी मा जाके गइया ला, लोंदी सबो खवाबो।
बन कांदा दसमूल गोंदली, के प्रसाद ला खाबो।।

धो धोवाके जिनिस किसानी, सुग्घर सबो सजाथे।।
नरियर चीला फूल चढ़ाके, गुड़ के सँग जेंवाथे।।

नीम डार खोंचे बर राउत, घर घर सबके जाथे।
बइगा घलो अशीस देके, दार चाऊँर पाथे।।

लइका मन हा मचथे गेड़ी, भारी मजा उठाथे।
दीदी बहिनी खो-खो फुगड़ी, खेले भाठा जाथे।।

                 ।।सावन।।
आगे सावन महिना संगी, बरसत हावय पानी।
खेत खार सब भरे लबालब, चूहन लागे छानी।।

करे बियासी चले किसनहा, नाँगर बइला जोड़े।
जोंत खेत ला चपके लेंझा, सँग मा बन ला कोड़े।।

                 ।।छोड़व भेद।।
सुख दुख के जिनगी मा संगी, रहिथे आना जाना।
दुख मा सुख ला जेन खोज ले, मनखे उही सयाना।

मनखे सब झन एके हावय, भेद कभू झन जानव।
जात पात के खन के डबरा, हिरदे ला झन चानव।

ऊँच नीच हा गुण ले होथे, धन ले जी नइ होवय।
मनखे धनवर होवय कतको, पइसा मा नइ सोवय।