// MATI MOR MITAN //
Sunday, April 27, 2025
अपन रंग मा रंगादे
Friday, March 31, 2023
रोला छन्द
रोला छन्द:- गुमान प्रसाद साहू
गजानन्द गणराज, तोर ले हावय विनती,
अपन भगत मा आज, करा ले हमरो गिनती।
रखबे देवा लाज, आय हन हाथ पसारे,
बना सबो के काज, भगत ला लेबे तारे।।2
पहिली बंदन तोर, करय जग के नर-नारी,
पूरा करथस आस, हवस तँय मंगलकारी।
गौरी सुत गणराज, विघन हारी तँय देवा,
सुनले हमर गुहार, करत रहिबो सम सेवा।।3
बढ़गे हावय पाप, आज गा जग मा भारी,
बढ़गे लूट खसोट, बढ़त हे अतियाचारी।
आजा ले अवतार,नाश तैं सबके करदे,
मिटा झूठ अउ पाप,बोझ भुइयाँ के हरदे।।4
रचना- गुमान प्रसाद साहू समोदा (महानदी), जिला-रायपुर छत्तीसगढ़
Wednesday, September 9, 2020
"मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई"
कोनो कहिथे तोला महिषासुर मर्दनी,
कोनो जगदम्बा पुकारत हे।
पूजा के थारी सजा के भगत मन,
आरती तोर उतारत हे।
कोनो तोला जगजननी कहिके ,
मातारानी ओ बलावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।
कोनो कहिथे तोला दूर्गा भवानी,
कोनो कहिथे तोला महामाई ओ।
कोनो कहिथे तोला काली कंकाली,
कोनो हर शीतला माई ओ।
तोरे दूलरवा भगत ह दाई,
सेवा ल तोरे गावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।
नवे दिन बर आये हस मईय्या,
तै हर हमर दूआरी म।
मया पिरीत बरसावत रहीबे,
मइया हमर फुलवारी म।
शेर के सवारी तोला ओ मईय्या,
बड़ गजब के सुहावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।
नवे दिन के बाद ओ मईय्या,
तै हर चले जाबे ओ।
अपन दूलरवा भगत ल ओ दाई,
तै हर झन भूलाबे ओ।
तोरे बिदाई के नाम ले ओ दाई,
मोर आँखी ले आँसू बोहावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।।
रचना :-
गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
थाना-आरंग रायपुर,छत्तीसगढ़
Saturday, August 22, 2020
गौरी के लाल
Friday, August 14, 2020
देश बर जीबो देश बर मरबो
Sunday, July 26, 2020
सरसी छन्द:-चलो मनाबो शिव भोला ला
सरसी छन्द-गुमान प्रसाद साहू
।। चलव मनाबो शिव भोला ला।।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।
बेल पान अउ फूल चढ़ाबो, संगे दीया बार।।1
आये हे सावन सम्मारी, रहिबो चलव उपास।
औघड़ दानी हावय बाबा, करही पूरा आस।।2
काँवर मा गंगा जल धरके, जाबो मंदिर द्वार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।3
घेंच साँप के माला पहिरे, कनिहा बघवा छाल।
तन मा चुपरे राख भभूती, रूप दिखै बिकराल।।4
माथ बिराजे चाँद दूज के, जटा म गंगा धार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।5
छन्दकार-गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी),जिला-रायपुर छत्तीसगढ़
Sunday, November 17, 2019
सार छन्द
।।परब आजादी।।
आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।
जय बोलव भारत माता के, राष्ट्र गान ला गावव।
बड़ मुश्किल मा मिले हवै जी, सब ला ये आजादी।
अउ होवन झन देहू संगी, अइसन जी बरबादी।
हरय तिरंगा शान देश के, लहर लहर लहरावव।
आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।।
मनखे मनखे एके हावय, भेद कभू झन जानौ।
जात पात के पाटव डबरा, धरम देश ला मानौ।
भेद मिटालव ऊँच नीच के, सुमता डोर बँधावव।
आये हावय परब अजादी, जुरमिल सबो मनावव।।
।।हवस मयावाली ओ।।
कोनो तोला दुर्गा कहिथे, अउ कोनो काली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, हवस मयावाली ओ।।
बढ़िस हवय भुइयाँ मा दाई, जब जब अतियाचारी।
आये तैंहा रक्षा खातिर, ले के वो अवतारी।।
पापी ला तँय मार गिराये,रुप धर बिकराली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।
कभू धरे तै रूप शीतला, कभू बने बम्लाई।
कभू बने जगदम्बा दाई, कभू बने सम्लाई।।
तीन लोक मा तँही समाये, माँ शेरावाली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।
आये जे हा तोर शरण मा, झोली अपन पसारे।
मन के आशा पूरा करके, जग ले तँही उबारे।।
सबके बिगड़ी तँही बनाये, दर आय सवाली ओ।
तँही जगत के जननी दाई, अबड़ मयावाली ओ।।
।।मँहगाई।।
दिन-दिन बाढ़त हावय कतका, दुनिया मा मँहगाई।
मनखे मन के हाल बिगड़गे, होवत हे करलाई।।
पेट भरे मजदूर अपन गा, जाँगर टोर कमाथे।
फेर बढ़त मँहगाई सेती, आधा पेट ग खाथे।।
देख हवय बेकारी कतका, ऊपर ले मँहगाई।
भाव जिनिस के आगी लगगे, होवत हे दुखदाई।।
सबो जिनिस हा मँहगा होगे, मँहगा घर के सपना।
मँहगा होगे आज देवता, पूजा करके जपना।।
मँहगा चाँउर दार सबो हा, खीसा होगे ढिल्ला।
मँहगाई मा घर ल चलाना, होगे आटा गिल्ला।।
।।परब हरेली।।
आये हावय परब हरेली, जुरमिल चलव मनाबो।
परब हमर ये पहिली संगी, सुग्घर सब परघाबो।।
सावन मास अमावस्या मा, ये तिहार हा आथे।
गाँव गाँव अउ गली गली मा, हरियाली बगराथे।।
बरदी मा जाके गइया ला, लोंदी सबो खवाबो।
बन कांदा दसमूल गोंदली, के प्रसाद ला खाबो।।
धो धोवाके जिनिस किसानी, सुग्घर सबो सजाथे।।
नरियर चीला फूल चढ़ाके, गुड़ के सँग जेंवाथे।।
नीम डार खोंचे बर राउत, घर घर सबके जाथे।
बइगा घलो अशीस देके, दार चाऊँर पाथे।।
लइका मन हा मचथे गेड़ी, भारी मजा उठाथे।
दीदी बहिनी खो-खो फुगड़ी, खेले भाठा जाथे।।
।।सावन।।
आगे सावन महिना संगी, बरसत हावय पानी।
खेत खार सब भरे लबालब, चूहन लागे छानी।।
करे बियासी चले किसनहा, नाँगर बइला जोड़े।
जोंत खेत ला चपके लेंझा, सँग मा बन ला कोड़े।।
।।छोड़व भेद।।
सुख दुख के जिनगी मा संगी, रहिथे आना जाना।
दुख मा सुख ला जेन खोज ले, मनखे उही सयाना।
मनखे सब झन एके हावय, भेद कभू झन जानव।
जात पात के खन के डबरा, हिरदे ला झन चानव।
ऊँच नीच हा गुण ले होथे, धन ले जी नइ होवय।
मनखे धनवर होवय कतको, पइसा मा नइ सोवय।