देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।
जब तक ले रहि तन मा श्वासा,लाज ला येकर बचाबो ग।।
खून बोहाये हे पुरखा हमर,अंग्रेज ले येला छोड़ाये बर।
हाँसत झुलगे फाँसी मा कतको, आजाद येला कराये बर।।
अइसन बीर सपूत के हमन,करजा ला चुका नइ पाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।1
पाँव पखारय सागर जेकर,खोपा हिमालय कहाथे।
सोन चिरइया हे भुइयाँ मा जेकर,अउ गंगा जमुना बोहाथे।।
जनम धरे हन ये भुइयाँ मा, अउ इही माटी मा मर जाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।2
माटी मा मिला देबो ओला,जे बैरी नजर देश ला लगाही।
कतको करलय प्रयास फेर, येकर धुर्रा घलो ला नइ पाही।।
बनके येकर रखवार हमन सब,सरहद मा येकर डट जाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।3
रचनाकार- गुमान प्रसाद साहू, ग्राम-समोदा(महानदी)
जिला - रायपुर, छत्तीसगढ़
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