सरसी छन्द-गुमान प्रसाद साहू
।। चलव मनाबो शिव भोला ला।।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।
बेल पान अउ फूल चढ़ाबो, संगे दीया बार।।1
आये हे सावन सम्मारी, रहिबो चलव उपास।
औघड़ दानी हावय बाबा, करही पूरा आस।।2
काँवर मा गंगा जल धरके, जाबो मंदिर द्वार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।3
घेंच साँप के माला पहिरे, कनिहा बघवा छाल।
तन मा चुपरे राख भभूती, रूप दिखै बिकराल।।4
माथ बिराजे चाँद दूज के, जटा म गंगा धार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।5
छन्दकार-गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा(महानदी),जिला-रायपुर छत्तीसगढ़
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