Thursday, October 26, 2017

(37)" मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी"

" मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी "

मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी..... माटी इहाँ के चंदन हे।
भूइंयाँ म इहाँ भगवान बिराजे..... ये माटी ल मोर बंदन हे।

चारों मुरा छाये हरियाली, जिहाँ बर पीपर के छइयाँ हे।
गुड़ी म बिराजे ठाकुर देंवता, तरिया पार म शीतला मईयाँ हे ।
ये भुइयां म हमन जनम धरे हन, जिनगी हमर धन धन हे।
मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी, माटी इहाँ के चंदन हे।।1।।

करम इहाँ के करना किसानी, खेती खार ह चारों धाम हे।
खून पसीना सब एक हो जाथे, इहाँ करथे अइसन काम हे।
बंजर म इहाँ सोना उपजइया, किसनहा ल मोर बंदन हे।
मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी, माटी इहाँ के चंदन हे।।2।।

दूसर के पीड़ा ल अपन समझथे, इहाँ जूरमिल सबो रहिथे ग।
भेद भाव ला कोनो नइ जाने, सब गुरतुर भाखा म कहिथे ग।
इही हमर हे छइयाँ भूइंयाँ, इही हमर बर लंदन हे।
मोर गंवई गांव हे मथूरा कांशी, माटी इहाँ के चंदन हे।।3।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग, रायपुर छ.ग.
Gpsahu2.blogspot.com

Wednesday, October 11, 2017

" कइसे मनाबो लछमी दाई "

"कइसे मनाबो लछमी दाई "

कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।
बंजर परे हे धनहा डोली, जिनगी चलत हे उधारी म।

खाये बर घर म दाना नइहे, कलपत हे पापी पेट ह।
इंदर राजा के रिसाये ले, सुक्खा परे सबो खेत ह।
कइसे मै लाहूं दीया चुकी, सजाये तोर पूजा थारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।।1।।

लिपे पोते नइ हन घर अंगना ल, छबाये नइहे दूआरी ओ।
कइसे करबोन हमन दाई, पूजा के तोरे तियारी ओ।
गरीबी के सागर म फंसे हे, डोंगा हमर मझधारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।।2।।

भरे बरसात नइ गिरीस पानी, फसल ह सबो भुँजागे ओ।
किसानी के करजा म दाई, लोगन ह सबो लदागे ओ।
कहाँ ले लाबो भोग तोर दाई, हाल घलो नइहे बारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म।।3।।

आस रिहीस हे आसो दाई, तोला बने मनातेन ओ।
चरण तोर पखार ओ दाई, मनके मनौती ल पातेन ओ।
हमर सबो के आस ह दाई, बोहागे अकाल के धारी म।
कइसे मनाबो लछमी दाई, तोला आसो देवारी म ।।4।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग, रायपुर ,छ.ग.
Gpsahu2.blogspot.com

Monday, October 2, 2017

" गांधी बाबा तुंहर देस म "

" गांधी बाबा तुंहर देस "

गांधी बाबा तुहर देस म, देखव का का होवत हे।
फूल के जगा म मनखे, कांटा मनला बोवत हे।।

कुरूक्षेत्र कस लागत हे, आज संसद भवन।
होवत  हावय मरयादा के, जिहाँ चिरहरन।
खलखलावत हे सइतान, मनखे मन सब रोवत हे।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।1।।

लोभ लालच के कण्डिल म, बत्तर कस मनखे झपावत हे।
रईस ह लाठी धरके संगी, कइसे गरीब ल आज कुदावत हे।
अटियावत हे चोरहा लबरा, डाकू ह धन ल जोहत हे।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।2।।

जगा-जगा म बिस्फोट होवत हे, हमर भारत देस म।
अतियाचारी लुकाय बैठे हे, आतंकवादी के भेष म।
नेता मन सबो घर म खूसरे, आराम चैन ले सोवत ह।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।3।।

भाई हर भाई बर बैरी बनगे, बेटा दाई-ददा ल बोझ समझत हे।
संयुक्त परवार म रहना, आज समझथे लोगन कनझट हे ।
राम धंधाय हे जेल म संगी, रावन हर छेल्ला किंदरत हे।
गांधी बाबा तुंहर देस म, देखव का का होवत हे।।4।।

रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977313968
थाना-आरंग, रायपुर छ.ग.