Wednesday, September 9, 2020

"मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई"

"मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई, सबके मन ल भावत हे।"

कोनो कहिथे तोला महिषासुर मर्दनी,
कोनो जगदम्बा पुकारत हे।
पूजा के थारी सजा के भगत मन,
आरती तोर उतारत हे।
कोनो तोला जगजननी कहिके ,
मातारानी ओ बलावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।

कोनो कहिथे तोला दूर्गा भवानी,
कोनो कहिथे तोला महामाई ओ।
कोनो कहिथे तोला काली कंकाली,
कोनो हर शीतला माई ओ।
तोरे दूलरवा भगत ह दाई,
सेवा ल तोरे गावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।

नवे दिन बर आये हस मईय्या,
तै हर हमर दूआरी म।
मया पिरीत बरसावत रहीबे,
मइया हमर फुलवारी म।
शेर के सवारी तोला ओ मईय्या,
बड़ गजब के सुहावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।

नवे दिन के बाद ओ मईय्या,
तै हर चले जाबे ओ।
अपन दूलरवा भगत ल ओ दाई,
तै हर झन भूलाबे ओ।
तोरे बिदाई के नाम ले ओ दाई,
मोर आँखी ले आँसू बोहावत हे।
मोहनी मूरतिया तोर ओ दाई,
सबके मन ल भावत हे।।

रचना :-
गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
थाना-आरंग रायपुर,छत्तीसगढ़ 
Gpsahu2.blogspot.com 

Saturday, August 22, 2020

गौरी के लाल

मनहरण घनाक्षरी:- गुमान प्रसाद साहू
।।गौरी के लाल।।
आके तोरे द्वार देवा,चरण के करै सेवा,भगत अरज करै,हाथ ला पसार के।
पहिली तोला मनावै,भोग मोदक लगावै,कर दे तै आस पूरा,कहत पुकार के।
बिपत के तै हरैया, तँही मंगल करैया,दुख दर्द दूर करौ,भव ले उबार के।
तँही एकदन्त धारी,मुसवा तोरे सवारी,पार लगा दे नइया,फँसे मँझधार के।।

सुन्दरी सवैया:-।।मंगलकारी गणेश।।
सब ले पहिली सुमरै गणनायक देेव समेत सबो नर नारी।
बिन तोर न काम बने जग के कहिथें तँय हावस मंगलकारी।
बिगड़ी ल बना दुख दूर करे सगरो जग के तँय पालनहारी।
शिवशंकर हावय तोर ददा जग के जननी गिरजा महतारी।।

छन्दकार- गुमान प्रसाद साहू ,ग्राम-समोदा(महानदी)
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ 
छन्द साधक "छन्द के छ" कक्षा-6

Friday, August 14, 2020

देश बर जीबो देश बर मरबो

।।देश बर जीबो देश बर मरबो।।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।
जब तक ले रहि तन मा श्वासा,लाज ला येकर बचाबो ग।।

खून बोहाये हे पुरखा हमर,अंग्रेज ले येला छोड़ाये बर।
हाँसत झुलगे फाँसी मा कतको, आजाद येला कराये बर।।
अइसन बीर सपूत के हमन,करजा ला चुका नइ पाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।1

पाँव पखारय सागर जेकर,खोपा हिमालय कहाथे।
सोन चिरइया हे भुइयाँ मा जेकर,अउ गंगा जमुना बोहाथे।।
जनम धरे हन ये भुइयाँ मा, अउ इही माटी मा मर जाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।2

माटी मा मिला देबो ओला,जे बैरी नजर देश ला लगाही।
कतको करलय प्रयास फेर, येकर धुर्रा घलो ला नइ पाही।।
बनके येकर रखवार हमन सब,सरहद मा येकर डट जाबो ग।
देश बर जीबो देश बर मरबो, देश के सेवा ल बजाबो ग।।3

रचनाकार- गुमान प्रसाद साहू, ग्राम-समोदा(महानदी)
जिला - रायपुर, छत्तीसगढ़ 
Gpsahu2.blogspot.com 

Sunday, July 26, 2020

सरसी छन्द:-चलो मनाबो शिव भोला ला

सरसी छन्द-गुमान प्रसाद साहू

।। चलव मनाबो शिव भोला ला।।

चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।

बेल पान अउ फूल चढ़ाबो, संगे दीया बार।।1

आये हे सावन सम्मारी, रहिबो चलव उपास।
औघड़ दानी हावय बाबा, करही पूरा आस।।2

काँवर मा गंगा जल धरके, जाबो मंदिर द्वार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।3

घेंच साँप के माला पहिरे, कनिहा बघवा छाल।
तन मा चुपरे राख भभूती, रूप दिखै बिकराल।।4

माथ बिराजे चाँद दूज के, जटा म गंगा धार।
चलव मनाबो शिव भोला ला, सावन के सम्मार।।5

छन्दकार-गुमान प्रसाद साहू 

ग्राम-समोदा(महानदी),जिला-रायपुर छत्तीसगढ़